
About Mallyuddh

मल्लयुद्ध, जिसे कुश्ती या पहलवानी के नाम से भी जाना जाता है, विश्व की सबसे प्राचीन कुश्ती परंपराओं में से एक है। यह खेल अखाड़ा कहलाने वाले पवित्र मिट्टी के मैदानों में खेला जाता है, जहां शारीरिक सामर्थ्य के साथ-साथ मानसिक अनुशासन और आत्मसंयम को भी समान महत्व दिया जाता है।
इसमें पहलवान अखाड़े की पवित्र मिट्टी पर दाँव-पेच से युद्ध करते हैं—जैसे धोबी पाछड़, अंतरी, कसौटी और पेटी दांव। इस क्रीड़ा में लक्ष्य प्रतिद्वंद्वी को नियमों के भीतर ही चित करना होता है, न कि आघात पहुंचाना।
मल्लयुद्ध शरीर को सबल बनाता है और मन में अनुशासन, धैर्य व सम्मान का संस्कार भरता है।
यह केवल खेल नहीं, भारत की प्राचीन परंपरा का जीवंत प्रतीक है।
आज भी मल्लयुद्ध की यह समृद्ध परंपरा देशभर के हज़ारों अखाड़ों में जीवित है। यहां युवा खिलाड़ी अनुभवी उस्तादों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और पीढ़ियों से चली आ रही तकनीकों, मूल्यों और अनुशासन को आगे बढ़ाते हैं।
मल्लयुद्ध केवल एक खेल नहीं,
यह भारत की मिट्टी से जुड़ी जीवित विरासत है।
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50 – 60 किलोग्राम
60 – 70 किलोग्राम
70 – 80 किलोग्राम
80 – 90 किलोग्राम
90 किलोग्राम एवं उससे अधिक

50 – 60 किलोग्राम
60 किलोग्राम एवं उससे अधिक
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